एक सोच एक बदलाव- स्वच्छता की ओर

देश को आजाद हुए 70 साल हो चुकेे हैं…

कहने को तो आज हम आजाद भारत मे सांस ले रहे है, लेकिन समाज मे कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनको देखकर लगता है कि हम सिर्फ कागजों मे ही आजाद हुए हैं न की समाज के कुरीतियों से, न ही उस पिछडे हुए सोच से..

मै Master LEADer माधव कुमार मौर्य, डी ए भी पीजी कॉलेज, वाराणसी (BHU) के छात्र समाज के एेसे पहलू पर बात कर रहा हूँ जिसमें लोगो ने पुराने बंधनो को तोडते हुए देश को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए एक आंदोलन छेड़ा है। क्योंकि वक्त आ गया है जब पुरा देश एकजुट होकर देश को स्वच्छ बनाने मे सफल कोशिश करे।

हमलोगों ने एक प्रयोग शुरु किया जिसका नाम है Make Village, Clean Village, उसमें हम लोग ऐसे घरों में शौचालय का निर्माण करा रहे हैं जिनके घर अभी तक शौचालय निर्माण से वंचित रह गये हैं। कहने को तो यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट है लेकिन हमने और हमारी पूरी टीम ने इसे अपने कर्तव्य की तरह किया और सफलता प्राप्त की, क्योंकि किसी को तो शुरुआत करनी ही पड़ती है, तो हम क्यो नहीं..?

कोई भी काम करते समय समस्याएं तो आती ही है, लेकिन ये हमपर निर्भर करता है कि हम किस प्रकार से उस समस्या को दूर करते हैं।

यह कार्य करने का विचार हमको 2016 मे आया था, जब हम लोग “एक कदम स्वच्छता की ओर” नाम से प्रोजेक्ट कर रहे थे। उसमें हम ऐसे लोगों को खुले मे शौच करने से मना कर रहे थे जिनके घर पर पहले से ही शौचालय था, फिर भी वे लोग पुरानी आदत के वजह से खुले मे जाते थे। लेकिन जब हमने लोगों से बात की तो पता चला कि 75% लोगो के घरों में अभी तक शौचालय नही बना है, तब हम लोगो ने  यह फैसला लिया कि कुछ भी हो जाये, एक न एक दिन अपने पूरे गॉव को खुले में शौच मुक्त बनाएँगे।IMG_20180601_113143 (1)

ठीक दो साल बाद यानि 2018 में हमलोगों को एक मौका मिला, जब प्रधानमंत्री के द्वारा पूरे देश में शौचालय का निर्माण कार्य शुरु किया गया जिसमें कि किसी भी वर्ग के व्यक्ति के घर शौचालय बनाने के लिए सरकार ने एक पहल किया था। इसमे हम लोग अपने ग्राम प्रधान के मदद के लिए आगे आए और सबसे पहले ऐसे घरों को चिन्हित किया जिनको इस योजना की सख्त ज़रूरत थी। उसके बाद हमने और हमारी टीम ने उन सभी परिवार का नाम रजिस्टर किया जिनको यह योजना का लाभ तत्काल चाहिए था और उन्हें रजिस्ट्रीकरण के एक हफ्ते के अंदर शौचालय निर्माण कार्य शुरू करने का भरोसा भी दिया।

IMG_20180601_113230 (1)भारत सरकार कहती है कि एक कदम आप चलो तो चार कदम हम चलेंगे, ऐसा ही कुछ हमारे गाँव सलारपुर वाराणसी मे भी देखने को मिला, लोग अपने घर शौचालय बनवाने के लिए खुद से गड्ढा खोदते थे, जिससे कि वे इसे इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबंध हो। उसके बाद हमारी टीम में से कोई एक लीडर उस गड्ढे का मुआयना करने के लिए जाता था और सब कुछ सही होने के बाद ग्राम प्रधान उसे शौचालय बनाने के लिए सामान मुहैया कराते थे।  ग्राम पंचायत के तरफ से उपभोक्ता के घर ईंट, बालू, गिट्टी , सीमेंट, छड़ और एक मिस्त्री भेज दिया जाता था और इस तरह शौचालय का निर्माण कार्य पूरा कराया जाता था।

हम लोगों की एक छोटी सी जिद थी, ऐसी जिद जिसको पूरा करने के लिए समाज के सभी वर्ग ने एक साथ आकर पूरा  सहयोग किया।

आज हमारे गाँव में कुल 650 नये शौचालय जरुरतमंदो के घर बनाये गये हैं जो खुद से बनवाने में असमर्थ थे। यह हमारे लिए काफी हर्ष की बात है। हम लोग ग्राम प्रधान को तहे दिल से धन्यवाद देते हैं जिन्होंने हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में काफी सहयोग दिया, वे हमारे साथ हमेशा खड़े रहें एवं साथ दिया।IMG_20180601_110925 (1)

यह प्रयोग हमलोगो ने एक छोटे से गाँव से प्रारम्भ किया था, जो कि सफल होने के बाद आज दूसरे गाँव में भी हम और हमारी टीम ने शुरु किया  है।

कुछ दिन पहले हमको एक फोन आया, वह फोन उत्तर प्रदेश के आजमगढ जिले से आया था,बात करने के पश्चात पता चला कि उस जिले के लोग भी ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैं, जिनको हमलोगों ने अभी दूर किया है, हमने उसे इस समस्या से लड़ने के लिए अपना तरीका बताया और उसकी हर संभव मदद करने का भरोसा भी दिया, जिससे कि वह भी इस समस्या से लड़ सके और परेशानी को दूर कर सके।

अच्छा लगता है, जब अपने काम को देखकर दूसरे जिले और गाँव के लोग भी सिखते हैं और उसे अपने यहाँ भी प्रयोग करते है। हमलोगों का लक्ष्य है कि अगले साल तक कम से कम अपने गाँव के आस पास के गावों को भी खुले में शौच मुक्त बना सके और एक सुंदर समाज का निर्माण कर सके। यह बदलाव आगे भी जारी रहेगी। मैं LEADCampus एवं एक सोच सैंडबॉक्स को धन्यवाद देना चाहता हूँ जो इस बदलाव के लिए प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया।
एक सोच एक बदलाव की ओर…

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